Sunday, November 13, 2011

ક્યાં હશે એ પરી , ક્યાં હશે ....


જેની આખો માં તડકા ને છાયા ,
જેની સાથે છે મોસમ ને માયા ,
વાત માં સાદગી ,બોલ માં તાજગી ,
ક્યાં હશે એ પરી , ક્યાં હશે ....
ક્યાં હશે એ પરી , ક્યાં હશે ....

વાદળ થી ઉજળું છે મન , પાંખો માં પહેરે પવન ,
ઝાકળ થી છલકાતા એના નયન ,પાપળ થી કાજળ તો કરતુ કવન ,
પલભર માં સંતાતી, પલભર માં દેખાતી, મળતી કદી સ્વપ્ન માં ,
ફૂલ ને ચુમતી, ગીત માં ઝૂમતી,
ક્યાં હશે એ પરી , ક્યાં હશે ....
ક્યાં હશે એ પરી , ક્યાં હશે ....

ચાંદ ની નગરી માં રહેતી હશે , ઝરણા ની સાથે વહેતી હશે ,
ઝરમરતી બુંદો  માં રમતી હશે , ગુંજે છે નામ એનું ચારે દિશા ,
લઇ ને મહેક એની ઉડતી હવા , પલભર માં સંતાતી  પલભર માં દેખાતી ,
મળતી હતી સ્વપ્ન માં .....
ધૂપ માં રંગ માં , કોઈ આકાર માં ,જો મળી તો કહું હું પરી
તું બની જા ને મારી પરી ...તું બની જા ને મારી પરી

--- By RJ Dhvanit
http://youtu.be/8x3-XZArcJg

College Days....


राह देखी थी इस दिन की कब से,आगे के सपने सजा रखे थे जाने कब से ,
बड़े उतावले थे जाने को, जिदगी का अगला पड़ाव पाने को,
पर न जाने क्यों आज दिल में कुछ और आता हे,
वक़्त को रोकने का जी चाहता है,
जीन बातो को लेकर रोते थे , आज उन पर हसी आती हे ,
न जाने क्यों आज उन पलो की याद बहुत सताती हे ,
बड़ी मुस्किल से ये 2 साल ख़त्म हो गया , पर नजाने क्यों बहुत कुछ पीछे रह गया ,
कही अनकही हजारो बाते रह गई , न भूलने वाली कुछ यादे रह गई ,
मेरी टांग अब कौन खीचा करेगा , सिर्फ मेरा सर खाने को कौन मेरा पीछा करेगा ,
छोटी छोटी बातो पर कौन मुझसे लडेगा, कौन रात भर जाग कर साथ पढ़ेगा ,
कौन मेरा लंच मुझसे पूछे बिना खायेगा , कौन मेरे नए नए नाम बनाएगा
में अब बिना मतलब किस से लडूंगा , बिना टोपिक के किसे फालतू बकवास करूँगा ,
कौन C ग्रेड आने पर दिलासा दिलाएगा , कौन A ग्रेड आने पर पार्टी मागेगा ,
किस के साथ अब कॉलेज के स्पोर्ट्स रूम में बिलियर्डस खेलूँगा , किस के साथ अब गाड़ी रेंट करके घुमने जाऊंगा अब जाने कब सब साथ कॉलेज के कैम्पस के सिंगास पिज्जा खाने जायेंगे ,कब पार्टी करने के लिए Sea site जायेंगे
रात को गाड़ी रेंट कर के Taco bell खाने कौन लेजायेगा ,singas पिज्जा में ज्यादा पिज्जा खाने की शर्त कौन रखेगा,
ऐसे दोस्त कहा मिलेंगे जो तुमे खाई में भी धक्का दे आये , और तुम्हे बचाने के लिए खुद भी कूद जाये,
अब मेरी बातो से परेशान कौन होगा , कभी मुझे किसी लड़की से बात करते देख हेरान कौन होगा,
वो बोरिंग लेक्चर कब सहेंगे, वो submission की deadline पे लायब्रेरी में फाइल कब कॉपी करेंगे,
वो सब साथ प्रग्नेश की कार में कॉलेज कब जायेगे , कह दो दोस्तों ये दिन फिरसे कब आयेंगे ,
मेरी काबलियत पे अब कौन मुझे भरोसा दिलाएगा , और ज्यादा उड़ने पर जमीन पर लायेगा
मेरी खुशी में सच में खुश कौन होगा , मेरे गम में मुझसे ज्यादा दुखी कौन होगा,
बहुत कुछ लिखना अभी बाकी हे , कुछ साथ शायद अभी बाकी हे,
बस एक बात से डर लगता हे दोस्तों , हम अजनबी ना बन जाये दोस्तों ,
जिंदगी के रंगों में दोस्ती का रंग फीका न पड़ जाए , कही एसा न हो दुसरे रिस्तो की भीड़ में दोस्ती दम तोड़ जाये ,
जिंदगी में मिलने की फरियाद करते रहेना , अगर ना मिल सके तो कमसे कम याद करते रहेना